‘राजन की महि’


VoW कैफै-गैलरी – स्टूडियो में 31 जुलाई को उपन्यास सम्राट मुंशी प्रेमचंद की जयंती के अवसर पर बुक लॉन्च एट VoW कैफै कार्यक्रम में भारत के नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षा कार्यालय के मीडिया सलाहकार बी.एस. चौहान के उपन्यास ‘राजन की महि’ का विमोचन किया गया, जो हंस प्रकाशन द्वारा हिन्दी में प्रकाशित किया गया है।


मुख्य चर्चाकर्ता संजय अभिज्ञान, सम्पादक, अमर उजाला ने भारतीय संविधान की महत्ता पर विशेष प्रकाश डाला। साथ ही उन्होंने ज़िक्र किया अमर उजाला के ‘बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ’ के स्थान पर ‘बेटी ही बचाएगी, बेटी ही पढ़ाएगी’ के विचार का। उनके साथ चर्चा में लेखक बी.एस. चौहान ने बताया कि उनका यह उपन्यास 2021 में ‘राजन की महि’ नाम से ही अंग्रेजी में रूब्रिक पब्लिशिंग द्वारा प्रकाशित हो चुका है। लेखक की 10 लघु कथाओं का संग्रह ‘बेटी को तलाशती आँखे’ शीर्षक से 2010 में प्रकाशित उनकी अन्य कृति है।


कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ. संजीव चोपड़ा आईएएस (सेवानिवृत्त), पूर्व निदेशक लाल बहादुर नैशनल एकडेमी ऑफ ऐड्मिनिस्ट्रेशन द्वारा की गई। महिलाओं और लड़कियों की समाज में स्थिति, वक़्त के साथ उसमें हुए सुधार, वर्तमान में मौजूद समस्याएं, उनके कारण तथा संभव समाधानों पर विस्तृत चर्चा की गई। विमोचन में उपस्थित श्रोताओं के सवालों को भी लेखक बी एस चौहान, संजय अभिज्ञान और संजीव चोपड़ा द्वारा उत्साहपूर्वक संबोधित किया गया।


इस उपन्यास की नायिका महि है, जो ज़िंदगी के सफर में बहुत पहले ही पिता को खो चुकी है; माँ दुग्ध वितरण केंद्र पर काम करके उसका पालन-पोषण करती है। 136 पन्नों का यह उपन्यास जीवन यात्रा है महि की जो राजन, एक सरकारी अफसर, के सहयोग से अच्छी शिक्षा ग्रहण करके लंदन में रोजगार प्राप्त करती है। फिर अपने बचपन के आईपीएस बनने के सपने को साकार करने के लिए यूपीएससी की दौड़ में शामिल होकर उसे पूर्ण करती है।


महि का इस सफर में एक मानसिक रोग- क्लेप्टोमेनिया से संघर्ष, बेमेल विवाह; तलाक सहित जीवन के कई उतार-चढ़ावों की यात्रा कथानक को विश्वसनीय बनाती है। रिश्तों के खट्टे-मीठे अनुभव और सफलता-असफलता की भावनाओं के मनोवैज्ञानिक विश्लेषण से उपन्यास पाठक को बाँधे रखता है।


कार्यक्रम में विजय, एडीजी, प्रेस इन्फॉर्मेशन ब्यूरो, रश्मि चोपड़ा, नीरज चौहान, शीतल चौहान, डीएवी पीजी कॉलेज की मंत्रणा डिबेटिंग सोसाइटी के छात्र-छात्राओं सहित कई अन्य लोग भी मौजूद रहे।








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